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हकृवि की नई उपलब्धि: मधुमक्खी बक्से के ‘मल्टीपरपज डिस्पेंसर’ को मिला पेटेंट

हकृवि को मधुमक्खी मल्टीपरपज डिस्पेंसर के लिए मिला पेटेंट, कुलपति ने वैज्ञानिक को दी बधाई

हिसार:

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) ने शोध के क्षेत्र में एक और नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक प्रोफेसर ओ.पी. चौधरी द्वारा मधुमक्खी बक्से के लिए विकसित किए गए ‘मल्टीपरपज डिस्पेंसर’ को भारत सरकार की ओर से डिज़ाइन पेटेंट (संख्या 320896-00) प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज कम्बोज ने प्रो. चौधरी को बधाई दी और इसे मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम बताया।

क्या है मल्टीपरपज डिस्पेंसर और कैसे करेगा काम?

कुलपति प्रो. कम्बोज ने जानकारी देते हुए बताया कि यह एक विशेष प्रकार का यंत्र है, जिसे मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों और बीमारियों की रोकथाम के लिए तैयार किया गया है।

• बहुउद्देशीय उपयोग: इस डिस्पेंसर के जरिए मधुमक्खी रोगों व कीटों (जैसे वरोआ माइट, मोमी पतंगा, यूरोपियन फ़ाउल ब्रूड आदि) को रोकने के लिए ठोस, द्रव, पाउडर या जेल किसी भी रूप में दवाइयों और रसायनों का प्रयोग आसानी से किया जा सकता है।

• सुरक्षा की गारंटी: इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मधुमक्खियों को रसायनों के सीधे संपर्क में आने से बचाता है। इससे शहद, पराग और रॉयल जैली जैसे उत्पादों में जहरीले रसायनों के अवशेष नहीं मिलते और उत्पाद शुद्ध रहते हैं।

• उपयोग में आसान: इसे मधुमक्खी के बक्से में तल्पपट्टा, फ्रेमों की टॉप बार या फ्रेमों के बीच कहीं भी लगाया जा सकता है। यह ‘एपिस मेलीफ़ेरा’ और ‘एपिस सेरेना’ दोनों प्रजातियों के लिए कारगर है।

अर्थव्यवस्था में मधुमक्खियों का बड़ा योगदान

विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र (करनाल) के निदेशक और इस यंत्र के आविष्कारक प्रो. ओ.पी. चौधरी ने बताया कि मधुमक्खियां परागण के जरिए भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रतिवर्ष लगभग 1.12 लाख करोड़ रुपये का योगदान देती हैं। पिछले कुछ वर्षों में ‘वरोआ माइट’ के हमले से देश में 50-70 प्रतिशत मधुमक्खी कालोनियां नष्ट हुई थीं। उनके द्वारा खोजा गया यह डिस्पेंसर और समन्वित वरोआ मैनेजमेंट विधि इस समस्या का प्रभावी समाधान है।

विशेष डिजाइन से घटेगी मेहनत

इस डिस्पेंसर का डिजाइन ऐसा है कि इसे गर्मी, सर्दी या बरसात किसी भी मौसम में मधुमक्खियों की दिनचर्या में बाधा डाले बिना इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे मधुमक्खी पालकों की मेहनत बचेगी और कार्यकुशलता बढ़ेगी।

ये रहे उपस्थित

इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. पवन कुमार, अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एस.के. पाहुजा और मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. रमेश कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे।


पेटेंट प्रमाणपत्र के साथ हकृवि के कुलपति प्रो. बलदेव राज कम्बोज, वैज्ञानिक प्रो. ओ.पी. चौधरी व अन्य अधिकारी।

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