शहीद उधम सिंह ने इंग्लैंड जाकर लिया था भारतीयों के खून का बदला, 21 साल तक सीने में दबी रही आग - एम.एस. निर्मल - eRealNews.Com
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शहीद उधम सिंह ने इंग्लैंड जाकर लिया था भारतीयों के खून का बदला, 21 साल तक सीने में दबी रही आग – एम.एस. निर्मल

मुख्य बिंदु:

  • शहीद उधम सिंह समिति द्वारा इन्द्री में जयंती समारोह और विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन।
  • सभी राजनीतिक दलों और संगठनों ने एक मंच पर आकर शहीद को दी श्रद्धांजलि।
  • समिति ने शहीद उधम सिंह की जीवनी को पाठ्य पुस्तकों में शामिल करने की मांग उठाई।
    इन्द्री (करनाल):
    आज जब समाज में जाति-पाति और धर्म के नाम पर दूरियां बढ़ रही हैं, ऐसे में शहीद-ए-आजम उधम सिंह का जीवन सांप्रदायिक सौहार्द की एक बड़ी मिसाल है। उन्होंने ‘राम मोहम्मद सिंह आजाद’ नाम रखकर एकता का संदेश दिया था। यह विचार शहीद उधम सिंह समिति के अध्यक्ष एम.एस. निर्मल ने इन्द्री में आयोजित शहीद उधम सिंह के जयंती समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
    इन्द्री में पिछले 20 वर्षों की परंपरा को निभाते हुए, इस वर्ष भी शहीद उधम सिंह समिति के तत्वावधान में सभी धर्मों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने एक मंच पर एकजुट होकर शहीद उधम सिंह को नमन किया। कार्यक्रम की शुरुआत हवन-यज्ञ और पूजन के साथ हुई, जिसे पंडित राजेश शर्मा ने विधि-विधान से संपन्न कराया। इसके उपरांत शहीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
    जलियांवाला बाग का बदला और 21 साल का इंतजार
    समारोह में एम.एस. निर्मल ने शहीद उधम सिंह की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 26 दिसंबर 1899 को सुनाम में जन्मे उधम सिंह ने बचपन में ही माता-पिता को खो दिया था। 13 अप्रैल 1919 को जब जनरल डायर और माइकल ओडवायर ने जलियांवाला बाग में निहत्थे भारतीयों पर गोलियां चलवाईं, तो उस खूनी मंजर ने उधम सिंह को झकझोर कर रख दिया। उन्होंने वहीं की खून से सनी मिट्टी हाथ में लेकर बदला लेने की कसम खाई।
    उन्होंने बताया कि इस प्रतिशोध के लिए उधम सिंह ने 21 साल लंबा इंतजार किया और अनेक यातनाएं झेलीं। अंततः 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में उन्होंने माइकल ओडवायर को गोलियों से भूनकर जलियांवाला बाग के शहीदों का बदला लिया और देश का गौरव बढ़ाया। 31 जुलाई 1940 को उन्हें फांसी दे दी गई।
    रक्तदान शिविर और प्रमुख मांगें
    इस अवसर पर प्रसिद्ध समाज सेवी संस्था ‘निफा’ के सहयोग से एक विशाल रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। समिति ने सरकार से मांग की कि शहीद उधम सिंह की जीवनी को स्कूली पाठ्य पुस्तकों में शामिल किया जाए और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों का नामकरण उनके नाम पर हो, ताकि युवा पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके।
    इस गरिमामयी समारोह में पूर्व मंत्री भीम मेहता, पूर्व विधायक राकेश काम्बोज, भाजपा नेता धर्मपाल शांडिल्य, प्रदीप काम्बोज, नगरपालिका चेयरमैन राकेश पाल, जेजेपी नेता गुरुदेव रम्भा, आप नेता प्रदीप काम्बोज, सुमेर काम्बोज (प्रदेशाध्यक्ष हरियाणा काम्बोज), निफा प्रधान सरवन शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, सरपंच और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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