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स्वास्थ्य मंत्री श्रीमती आरती सिंह राव ने बताया कि राज्य सरकार ने सभी एलोपैथिक दवा निर्माताओं को रिस्की–सॉल्वैंट्स (जैसे प्रोपीलीन ग्लाइकोल, ग्लाइकोल, ग्लिसरीन आदि) के उपयोग में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने इस दिशा में पहले ही निरीक्षण शुरू कर दिए थे — अब तक 37 निरीक्षण किए जा चुके हैं और 54 नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।
उन्होंने बताया कि “सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO)” के साथ संयुक्त निरीक्षण भी प्रारंभ किए गए हैं, जिनमें अब तक 14 निरीक्षण और 31 नमूने लिए जा चुके हैं। जिन दवा निर्माताओं में विसंगतियां पाई गई हैं, उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि हरियाणा का स्वास्थ्य विभाग पहले से ही ऑनलाइन नेशनल ड्रग्स लाइसेंसिंग सिस्टम (ONDLS) पर कार्य कर रहा है और सभी विनिर्माण व बिक्री लाइसेंस इसी पोर्टल के माध्यम से जारी किए जा रहे हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने हरियाणा सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों और पारदर्शी प्रणाली की सराहना की।

